भूधर नारायण मिश्रा-भगत सिंह जी की जयंती पर कोटि कोटि नमन
मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में अपने देश के लिए हंसते हंसते प्राणों को न्यौछावर कर देने वाले वीर भगत सिंह की आज जयंती है, आज से 113 वर्ष पूर्व पंजाब प्रांत के लायपुर में शहीद भगत सिंह जन्में थे. अंग्रेजी शासन की जड़ों को खोखला कर देने वाले इस जाबांज क्रांतिकारी के हृदय में बचपन से देश के लिए अथाह प्रेम था. वह पहले महात्मा गाँधी से बहुत अधिक प्रभावित थे किंतु वर्ष 1922 में चौरी-चौरा घटना के बाद असहयोग आंदोलन समाप्त करने की घोषणा के बाद से भगत सिंह अहिंसावादी विचारधारा से दूर हो गए.

"इंकलाब जिंदाबाद" के नारे को सार्थक करने वाले भगत सिंह न केवल एक क्रांतिकारी अपितु एक कुशल वक्ता, कलम के जादूगर और दूरदृष्टि रखने वाले युवा थे. छोटी सी आयु में भी उनके विचार इतने प्रभावशाली और परिपक्व थे कि आज़ादी व देशभक्ति के अतिरिक्त उनके हृदय में अन्य किसी भौतिक वस्तु की अभिलाषा नहीं थी. वर्ष 1926 में आजाद भारत की संकल्पना के साथ उन्होंने नौजवान भारत सभा की स्थापना की और सुखदेव एवं राजगुरु के साथ मिलकर काकोरी कांड को अंजाम दिया. अंग्रेजी हुकूमत को जगाने के लिए उन्होंने अग्रेजी अफसर जेपी सांडर्स को भी मारा और ब्रिटिश भारत की अलीपुर रोड, दिल्ली में स्थित तत्कालीन सेंट्रल असेंबली के सभागार में बम एवं पर्चे फेंके. भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर 24 मार्च 1931 को मौत की सजा देना तय किया था लेकिन जनाक्रोश के भय के चलते उन्होंने 23 मार्च को ही फांसी पर चढ़ा दिया गया.
जानिये वीर शहीद-ए-आजम के क्रांतिकारी विचार
अगर बहरों को अपनी बात सुनानी है तो आवाज़ को जोरदार होना होगा. जब हमने बम फेंका तो हमारा उद्देश्य किसी को मारना नहीं था. हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था. अंग्रेजों को भारत छोड़ना और उसे आजाद करना चाहिए.
जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं.
निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार, ये दोनों क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण हैं.
देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं.
सूर्य विश्व में हर किसी देश पर उज्ज्वल हो कर गुजरता है परन्तु उस समय ऐसा कोई देश नहीं होगा जो भारत देश के समान इतना स्वतंत्र, इतना खुशहाल, इतना प्यारा हो.
किसी भी इंसान को मारना आसान है, परन्तु उसके विचारों को नहीं. महान साम्राज्य टूट जाते हैं, तबाह हो जाते हैं, जबकि उनके विचार बच जाते हैं.
मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है.
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